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भोना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भोना पु क्रि॰ अ॰ [हिं॰ भीनना]

१. भीनना । संचरित होना । उ॰—रेख कछू कछू अंजन की कछु खजन वी अरुनाई रही भ्वै ।—रघुनाथ (शब्द॰) । (ख) तब लागी गावन विभास बीच ख्याल एक ताल तान सुर को बँधान वीच भ्वै रही—रघुनाथ (शब्द॰) ।

२. लिप्त होना ।

३. आसक्त होना । अनुरक्त होना । संयो॰ क्रि॰—जाना ।—पड़ना ।