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भ्राजना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भ्राजना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ भ्राजन (=दीपन)]

१. शोभा पाना । शोभायमान होना । उ॰—(क) उर आयत भ्राजत बिबिध बाल बिभूषन बीर ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) केकी पच्छ मुकुट सिर भ्राजत । गौरी राग मिले सुर गावत ।—सूर (शब्द॰) ।

२. चमकना ।