भ्रामर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भ्रामर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. भ्रमर से उत्पन्न, मधु । शहद ।
२. दोहे का दूसरा भेद । इसमें २१ गुरु और ६ लघु मात्राएँ होती हैं । जैसे,—माधो मेरे ही बसो राखो मेरी लाज । कामी क्रोधी लंपटी जानि न छाँड़ी काज ।
३. वह नृत्य जिसमें बहुत से लोग मंडल बनाकर नाचते हैं । रास ।
४. चुंबक पत्थर ।
५. अपस्मार रोग ।
६. ग्राम । गाँव (को॰) ।
७. एक रतिबंध । रति का एक प्रकार (को॰) ।
भ्रामर ^२ वि॰ भ्रमर संबंधी । भ्रमर का ।