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भ्रित्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भ्रित्य पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ भृत्य] दे॰ 'भृत्य' । उ॰—तहाँ सदा सनमुख रहै आगै हाथ जोडै भ्रित्य ही ।—सुंदर॰ ग्रं॰ भा॰ १, पृ॰ २७ ।