मँगनी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मँगनी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ मगिन + ई (प्रत्य॰)]

१. माँगने की क्रिया या भाव ।

२. वह पदार्थ जो किसी से इस शर्त पर भाँगकर लिया जाय कि कुछ समय तक काम लेने के उपरां त फिर लौटा दिया जायगा । जैसे, मँगनी की गाड़ी, मँगनी की किताब ।

३. इस प्रकार माँगने की क्रिया या भाव । क्रि॰ प्र॰—देना ।—माँगना ।—लेना ।

४. विवाह के पहले की वह रस्म जिसके अनुसार वर और कन्या का संबंध निश्चित होता है । जैसे, चट मँगती, पट ब्याह । उ॰—धत् मेरी मँगनी हो गई है, देखते नहीं यह रिशमी बूटे का सालू ।—गुलेरी । विशेष—साधारणतः वर पक्ष के लोग कन्या पक्षवालों से विवाह के लिये कन्या माँगा करते हैं, और जब वर तथा कन्या के विवाह की बात चीत पक्की होती है, तब उसे मँगनी कहते हैं । इसके कुछ दिनों के उपरांत विवाह होता है । मँगनी केवल सामाजिक रीति है, कीई धार्मिक कृत्य नहीं है । अतः एक स्थान पर मँगनी हो जाने पर संबंध छूट सकता है और दूसरी जगह विवाह हो सकता है ।