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मक्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मक्र पु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ मकर] दे॰ 'मकर' । उ॰—महा मक्र से सूर सावत पीनं ।—हम्मीर॰, पृ॰ ५९ ।

मक्र ^२ संज्ञा पुं॰ [अ॰]

१. छल । कपट । धोखा । उ॰—ऐसा मालूम हो रहा था । कि मक्र किए पड़ी है, और देख रही है कि राजा साहब क्या करते हैं ।—काया॰, पृ॰ ४८९ ।

२. नखरा । यौ॰—मक्रचाँदनी=दे॰ 'मकर चाँदनी' ।