मण्डूक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मंडूक संज्ञा पुं॰ [सं॰ मण्डूक]

१. मेंढक । उ॰—मडूकों का टर टर करना भी कैसा डरावना मालूम होता है ।—भारतैंदु ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ २९८ ।

२. एक ऋषि ।

३. दोहा छंद का पाँचवाँ भेद जिसमें १८ गुरु और १२ लघु अक्षर होते हैं ।

४. रुद्रताल के ग्यारह भेदों में से एक ।

५. प्राचीन काल का एक बाजा ।

६. एक प्रकार का नृत्य ।

७. एक प्रकार का रतिबंध (को॰) ।

८. घोड़े की एक जाति । यौ॰—मंडूककुल = मेढकों का समूड़ । मंडूकगति = (१) मेढक की सी चालवाला । (२) दे॰ 'मडूकप्लुति' । मंडूकपर्ण । मडूकपर्णा, मंडूकपर्णिका = दे॰ 'मंडूकपर्णीका' । मंडूकप्लुति । मडूकमाता । मंडूकसर = मेढ कों से भरा तालाब । मंडूकसूक्त ।