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मत्तमातंगलीलाकर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मत्तमातंगलीलाकर संज्ञा पुं॰ [सं॰ मत्तमातड़्गलीलाकर] एक दंड़क वृत जिसके प्रत्येक चरण में नौ रगण होते हैं । जैसे,— सच्चिदानंद अनंद के कंद को छाड़ि कै रे मतीमंद भूलो फिरै ना कहूँ । विशेष—नौ से अधिक 'रगण' वाले दंडक भी इसी नाम से पुकारे जाते हैं । केशवदास ने आठ ही रगण के छंद का नाम 'मत्तमातंगलीलाकर' लिखा है । जैसे,—मेघ मंदाकिनी बारु सौदामिनी रूप खरे लसै देह धारी मनो ।