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मथान

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मथान संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मन्थन]

१. मंथन । बिलोड़न । उ॰—मड़ि मथान मन रई को फेरना, होत घमसान तहँ गगन गाजै ।—कबीर॰ सा॰ सं॰, पृ॰ ९१ ।

२. चखचख । खलबली । मथने की घरघराहट । उ॰—लोग कहैं बौरान काहि की पकरों बानी । घर घर घोर मथान फिरो में नाम दिवानी ।—पलटू॰, भा॰ १, पृ॰ ३१ ।