मदग्
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मदग् संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. एक प्रकार का जलपक्षी जिसे जलपाद और लमपुछार भी कहते हैं । विशेष—इसकी लंबाई पूँछ से चोंच तक ३२ से ३४ इंच तक होती है । इसके डैने कुछ पीलापन लिए होते हैं । पूँछ काली, चोंच पीली और मुँह, कनपटी और गले के नीचे का भाग सफैद तथा पैर काले होते हैं । यह भारतवर्ष के प्रायः सभी भागों में, विशेषकर पहाड़ी और जंगली प्रदेशों में, होता है । वैद्यक में इसका मांस शीतल, वायुनाशक स्निग्ध और भेदक माना गया है । यह रक्तपित्त के विकारों को दूर करता हैं ।
२. पेड़ पर रहनेवाला एक प्रकार का जंतु ।
३. मदगुरी मछली । मंगुर ।
४. एक प्रकार का साँप ।
५. एक प्रकार का युद्धपोत ।
६. एक वर्णसंकर जाति का नाम । विशेष—मनुस्मृति में इसकी उत्पत्ति ब्राह्मण पिता और बंदी जाति की माता से लिखीं है और इसका काम वन्य पशुओं को मारना बताया गया है ।