मदनहरा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मदनहरा संज्ञा स्ञी॰ [सं॰] चालीस मात्राओं के एक छंद का नाम । विशेष—छंदप्रभाकर में इसे मनहर लिखा है और दस, आठ, चौदह और आठ पर यति तथा आदि की दो मात्राओं का लघू और अंत की मात्रा का ह्रस्व होना लिखा है । उ॰—सग सीय लक्ष्मण, श्री रघुनंदन, मातन के शुभ पाइय रे सब दुःख हरे । इसे मदनगृह भी कहते हैं । इसके यति और आदि की लघु मात्रा के नियम को कोई कोई कवि नहीं मानते ।—जैसे,—सादल नजीब, महमूद आकबत, जैता गूजर सहित देख जुद्ध पढ़े ।—सूदन (शब्द॰) ।