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मधुमार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मधुमार संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक मात्रिक छंद जिसके प्रत्येक चरण में आठ मात्राएँ होती हैं और अंत में जगण होता है । जैसे—प्रभु हौं सुदीन । तुम हो प्रवीन । जग मँह महेश । हरिए कलेश ।