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मध्यमपदलोपी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मध्यमपदलोपी संज्ञा पुं॰ [सं॰ मध्यमपदलोपिन्] व्याकरण में वह सगास जिसमें पहले पद मे दूसरे पद का संबंध बतलानेवाला शब्द लुप्त या समास से अध्याहत रहता है । लुप्तपदसमास । विशेष—कुध कर्मधारय और कुछ बहुब्रीहि समास मध्यमपद- लोपी हुआ करते हैं । जैसे, पर्णशाला (पर्णनिर्मितशाला) । जेब घड़ी (जैब में रहनेवाली घड़ी), मृगनयनी (मृग के समान नयनोंवाली) ।