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मनःपर्याय

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मनःपर्याय संज्ञा पुं॰ [सं॰] जैन शास्वानुसार वह ज्ञान जिससे चितित अर्थ का साक्षात होता है । यह ज्ञान ईर्ष्या और अंतराय नामक ज्ञानावरणों के दूर होने पर निर्वाण या मुक्ति की प्राप्ति के पूर्व की अवस्था में प्राप्त होता है । इसमें जीवों को मनरूपी द्रव्य के पर्यायों का साक्षात ज्ञान होता है ।