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मनमोहन

विक्षनरी से

मनमोहन

  1. जो मन को मोह ले; अत्यंत आकर्षक या मनभावन।
  2. रूप, व्यवहार या गुणों से मन को आकर्षित करने वाला।
  3. भगवान कृष्ण का एक विशेषण भी।

(Delhi) आईपीए(कुंजी): /mən.moː.ɦən/, [mə̃n̪.moː.ɦə̃n̪]

उदाहरण वाक्य

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  • वह बालक अपनी मनमोहन मुस्कान से सबका प्रिय बन गया।
  • राधा ने मनमोहन कृष्ण की आराधना की।

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मनमोहन ^१ वि॰ [हिं॰ मन + मोहन] [वि॰ स्त्री॰ मनमोहनी]

१. मन को मोहनेवाला । मन को लुभानेवाला । चिताकर्षक । मुग्धकारक । उ॰—(क) रूप जगत मनमोहन जेहि पद्यावति नाउँ । कोटि तरब तुहि देहौं आनि करेसि इक ठाउँ ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) पटुली कनक की तिही वानक की बनी मन- मोहनी ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ ३७५ ।

२. प्रिय । प्यारा ।

मनमोहन ^२ संज्ञा पुं॰

१. श्रीकृष्णचंद्र का एक नाम । उ॰—मनमोहन खेलत चौगान । द्वारवती कोट कंचन में रच्यो रुचिर मैदान ।—सूर (शब्द॰) ।

२. एक मात्रिक छंद का नाम जिसके प्रत्येक चरण में चौदह मात्राएँ होती हैं, जिनमें से अंतिम मात्राओं का लघु होना आवश्यक है । जैसे,—तुमहि निहोरे खुले करम तुमही भजे पावही धरम ।

३. एक प्रकार का सदाबहार वृक्ष । विशेष—यह वृक्ष बरमा, जावा आदि देशों में होता है । यह सीधा और ऊँचा होता है । इसकी लकड़ी साफ होती है और इसपर रंग खूब खिलता है । इसके फूल बहुत सुगंधित होते हैं जिनसे अतर निकाला जाता है । इस इतर को 'इलंग' कहते हैं और यूरोप में इसको बहुत खपत होती है । इसे अब लोग बंगाल में भी बागों में लगाते हैं । यह बीजों से उगता हैं ।