मनरंजन
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मनरंजन ^१ वि॰ [हिं॰ मन + रंजना] मनोरंजन करनेवाला । मन को प्रसन्न करनेवाला । मनोरंजक । उ॰—(क) भृंगी री भज चरण कमल पद जहँ नहिं निशि को त्रास । जहँ बिधु भान समान प्रभा नख सो वारिज सुखरास । जिहिं किंजल्क भक्ति नव लक्षण काम ज्ञान रस एक । निगम सनक शुक नारद शारद मुनिजन भृंगर अनेक । शिव विरंचि खंजन मनरंजन छिन छिन करत प्रवेश । अखिल कोश तहँ वसत सुकृत जन परगट श्याम दिनेश । सुनि मधुकरी भरम तजि निर्भय राजिव वर की आस । सूरज प्रेम सिंधु में प्रफुलित तहँ चलि करे निवास ।—सूर (शब्द॰) । (ख) थिरकत सहज सुभाव सौं चलत चपल गत सैन । मनरंजन रिझवार के खंजन तेरे नैन ।—रसनिधि (शब्द॰) ।
मनरंजन ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'मनोरंजन' ।