मनहरण
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मनहरण ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ मन + हरण]
१. मन हरने की क्रिया या भाव ।
२. पंद्रह अक्षरों का एक वर्णिक छंद जिसके प्रत्येक चरण में पाँच सगण होते हैं । इसे नलिनी और भ्रमरावली भी कहते हैं । जैसे,—दुर्जन की हानि विरधापनोई करै पर गुण लोप होत इक मोतिन को हार ही । (शब्द॰) ।
मनहरण ^२ वि॰ मनोहर । सुंदर ।