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मनाग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मनाग वि॰ [सं॰ मनाग्] दे॰ 'मनाक' । उ॰—अस्थिमात्र होइ रहे सरोरा । तदाप मनाग मनहिं नहिं पीरा ।—तुलसी (शब्द॰) ।