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मनुआँ

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शब्दसागर

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मनुआँ ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं मन] मन । उ॰—(क) मनुआ चाह देख औ भोगू । पंथ भुलाइ विनासै जोगू ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) चंचल मनुआ दुहुदिसि धावत अचल जाहि ठहराना । कहु नानक यहि विधि का जो नर मुक्ति ताहि तुम माना ।— तेगबहादुर (शब्द॰) ।

मनुआँ ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ मानव] मनुष्य । उ॰—खाय पकाय लुटाय ले ऐ मनुआँ मजवान । लना होय सो लेइ ले यहा गोइ मैदान ।—कबीर (शब्द॰) ।

मनुआँ ^३ संज्ञा पुं॰ [देश॰] देव कपास । नरमा मनवाँ ।