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मयमन्त

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शब्दसागर

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मयमंत वि॰ [सं॰ मदमत्त, प्रा॰, मयत्त मत्यंत] मस्त । मदामत । उ॰—(क) महाराज दसरथ पुनि सोवत । हा रघुपति लछिमन बैदेही सुमिरि सुमिरि गुण रोवत । त्रिया चरित मयमंत न सूझत उठि पखाल मुख धोवत । महा विपरीत रीत कछु औरे बार बार मुख जोवन ।—सूर (शब्द॰) ।(ख) जोबन अस मयमंत न कोई । नवे हस्ति जो आकुस होई ।—जायसी (शब्द॰) ।