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मयारी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मयारी संज्ञा स्त्री॰ [देश॰]

१. वह ड़डा या धरन जिसपर हिंड़ोले की रस्सी लटकाई जाती है । उ॰—सुनि विनय श्रीपति बिहँसि बोले विश्वकर्मा श्रुतिधारि । खचि खंभ कंचन के रचि पचि राजति मरुवा मयारि । पटुलों लगे नग नाग बहु रंग बनी डाँड़ी चारि । भँवरा भवै भजि केलि भूले नगर नागर नारि ।— सूर (शब्द॰) ।

२. छाजन की वह धरन जिसपर बहुआ के आधार पर बंडेर रहतो है । उ॰— छानि बरेडि औ पार पछीति मयारि कहा किहि काम के कारे ।— अकबरी॰, पृ॰ ३५४ ।