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मरगजा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मरगजा पु † ^१ वि॰ [हि॰ मलना + गींजना] [वि॰ स्त्री॰ मरगजी] मला दला । मसला हुआ । गींजा हुआ । मलित दलित । उ॰— (क) सब अरगज मरगज भा लोचन पीत सरोज । सत्य कहहु पद्मावत सखी परी सब खोज ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) धर पठई प्यारी अंक भरि । कर अपने मुख परसि त्रिया के प्रेम सहित दोऊ भुज धरि धरि । सँग सुख लूटि हरष भई हिरदय चली भवन भामिनि गजगति ढरि । अँग मरगजी पटोरी राजति छबि निरखत ठाढ़े ठाढ़े हरि ।— सूर (शब्द॰) । (ग) तुम सौतिन देखत दई अपने हिय ते लाल । फिरत सबत में ड़हडही डहै मरगजी भाल ।— बिहारी (शब्द॰) । (घ) अटपटे भूषन मरगजी सारी, बंदन परसों भाल सों ।— छीत॰, ७१ । मरगजी सारी, वंदन परस्यौ भाल सों ।— छीत॰, पृ॰ ७१ ।

मरगजा ^२ संज्ञा पुं॰ [हि॰] दे॰ 'मलगजा ^२' ।