मरजिया
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मरजिया ^१ वि॰ [हि॰ मरना+जीना]
१. मरकत जीनेवाला । जो मरने से बचा हो । उ॰— (क) तस राजै रानी कँठ लाई पिय मरजिया नारि जनु पाई ।—जायसी (शब्द॰) ।
२. मृतप्राय । जो मरने के समीप हो । मरणासन्न । उ॰—पद्मावति जो पावा पीऊ । जनु मरजिये परा तनु जीऊ ।—जायसी (शब्द॰) ।
३. जो प्राण देने पर उतारू हो । मरनेवाला । उ॰— अव यह कौन पानि मैं पोया । भै तनु पाँख पतंग मरजीया ।—जायासी (शब्द॰) ।
४. बधमरा । उ॰—जहँ अस परी समुँद नग दीया । तेहि किम जिया चहँ मरजीया ।—जायसी (शब्द॰) ।
मरजिया ^२ संज्ञा पुं॰ जो पानी में ड़ूबकर उसके भोतर से चीजों को निकालता है । समुद्र में ड़ूबकर उसके भीतर से मोती आदि निकालनेवाला । जिवकिया । उ॰—(क) जस मरजिया समुँद धँसि मारे हाथ आल तब सीप । ढूँढि लेहु जो स्वर्ग दुआरे चढे सो सिंहल दीप ।—जायसी (शब्द॰) (ख) कविता चेला विधि गुरू सीप सेवातो बुंद । तेहि मानुष की आस का जो मरजिया समुंद्र ।—जायसी (शब्द॰) । (ग) तन समुद्र मन मरजिया एक बार धँसि लेइ । की लाल लै नीकसे को लालच जिउ देइ ।—कबीर (शब्द॰) ।