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मर्दना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मर्दना पु क्रि॰ सं॰ [सं॰ मर्दन]

१. अंग आदि पर जोर से हाथ फेरना । मालिश करना । उ॰—तन मर्दति पिय के तिया, दरसावति झुट रोष ।—पद्माकर (शब्द॰) ।

२. उवटन तेल आदि को अंगों पर चुपड़कर बलपूर्वक चुपड़े हुए स्थान पर बार बार हाथ फेरना जिससे अंग में उसका सार या स्निग्ध अंश घुस जाय । मलना ।

३. चूर्णित करना । तोड़ फोड़ ड़ालना ।

४. मसककर विकृत करना । नाशा करना । कुचलना । रौंदना । उ॰—(क) कबहुँ विटप भूधर उपारि पर सेन बरक्खे । कबहुँ बाजि सन बाजि मर्दि गजराज करक्खे ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) खाऐसि फल अरु विटप उपारे । रच्छक मर्दि मर्दि महि ड़ारे ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) जेहि शर मधु मद मर्दि महासुर मर्दन कीन्हें । मारयौ कर्कश नरक शंख हनि शंख सुलीन्हो ।— केशव (शब्द॰) ।