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मलयगिरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मलयगिरी संज्ञा पुं॰ [हिं॰ मलयगिरि] दारचीनी की जाति का एक प्रकार का बड़ा और बहुत ऊचा वृक्ष जो कामरुप, आसाम और दार्जिलिंग में उत्पन्न होता है । विशेष—इसकी छाल दो अंगुल से चार पाँच अंगुल तक मोटी होती है और लकड़ी भारी, पीलापन लिए सफेद रंग की होती है । इसकी छाल और लकड़ी दोनों सुगंधित होती हैं । लकड़ी बहुत मजबुत होती है और साफ करने पर चमकदार निकलती है जिसमें दीमक आदि कीड़े नहीं लगते । इससे मेज, कुरसी, संदुक आदि बनते हैं और इमारत आदि में भी यह काम आती है । वसंत ऋतु में बीज बोने से यह वृक्ष उगता है ।