मलिन्द
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मलिंद संज्ञा पुं॰ [सं॰ मलिन्द] भ्रमर । भौंरा । उ॰—(क) मल्लिकान मंजुल मलिंद मतवारे मिले, मंद मंद मारुत मुहीम मनसा की है ।—पद्माकर (शब्द॰) । (ख) नेह सरीखी रज्जु नहिं, कविवर करै विचार । वारिज बाँध्यो मलिंद लखि, दार बिदारन हार ।—दीनदयाल (शब्द॰) । (ग) मंजुल मंजरी पै हो मलिंद विचारि कै भार सम्हारि कै दीजियो ।—व्यंग्यांर्थ (शब्द॰) ।
मलिंद पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ मिलिन्द] भौंरा । भ्रमर । उ॰ - मदरस मत्त मिलिंद गन, गान मुदित गननाथ ।—मतिराम (शब्द॰) ।