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मल्हाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मल्हाना † क्रि॰ स॰ [सं॰ मल्ह(= गोस्तन) ] चुमकारना । पुचकारना । मल्हराना । उ॰— (क) यशोदा हरि पालनहि झुलावै । हलरावै दुलराइ मल्हावै जोइ सोइ कछु गावै ।— सूर (शब्द॰) । (ख) वछरू छबीले छौना छगन मगन मेरे कहति मल्हाइ मल्हाई । सानुज हिय हुलसति, तुलसी के प्रभु की ललित ललित लरिकाई ।— तुलसी (शब्द॰) । (ग) कहति मल्हाइ मल्हाइ उर छिन छिन छगन छवीले छोटे छैया । मोद कंद कुल कुमुद चंद मेरे रामचेद्र रघुरैया ।— तुलसी (शब्द॰) ।

मल्हाना पु ^२ क्रि॰ अ॰ [अप॰ मल्ह] पुचकारना । किसी का चरित्र- गान करना । रह रहकर गाना । उ॰—कवण देस तइँ आविया, किहाँ तुम्हारउ वास । कुणँ ढोलउ, कुण मारूवि, राति मल्हाया जास ।—ढोला॰, दू॰,१९५ ।