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मसकला

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मसकला संज्ञा पु॰ [अ॰ मलकलह्]

१. सिकलीगरों का एक औजार जो हँसिया के आकार का होता है और जिसमें काठ का एक दस्ता लगा रहता है । इससे रगड़ने से धातुओं पर चमक आ जाती है । प्राय: तलवारें आदि भी इसी से साफ की जाती हैं । उ॰—(क) गुरू सिकलौगर कीजिए, ज्ञान मसकला देइ । मन की मैल छुड़ाइ कै, सुचि दर्पण कर लेइ । —कबीर (शब्द॰) । (ख) शिष्य खाँड़ गुरू मसकला, चढै शब्द खरसान । शब्द सहे सन्मुख रहे, निपंज शिष्य सुजान । —कबीर (शब्द॰) ।

२. सैकल या सिकली करने की क्रिया ।