महूख
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]महूख संज्ञा पुं॰ [सं॰ मधूक]
१. महुआ । उ॰—(क) छिनक छबीले लाल वह जौ लगि नहिं वतराय । ऊख महुख पियूख की तौ लगि भूख न जाय ।—बिहारी (शब्द॰) । (ख) ऊख रस केतकु महुख रस मीठो है पियूखहु की पैली घाहे जाको नियराइए ।— (शब्द॰) (ग) कहाँ ऊख महूख में एतो मिठास पियूख हूँ ना हरिऔव हहै । जितो चारुता कोमलता सुकुमारता माधुरता अधरा में अहै ।—हरिऔध (शब्द॰) ।
२. मधु । शहद । उ॰— महुवा मिशी दूध घृत अति सिंगार रस मिष्ट । ऊख, महुख, पियूख, शाने केसव सोचो इष्ट ।—केशव ग्रं॰ भा॰ १, पृ॰ १२५ ।
३. जेठोमधु । मुलेठी ।