माँकड़ी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]माँकड़ी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ मकड़ी]
१. दे॰ 'मकड़ी' ।
२. कमखाब बुननेवालों का एक औजार । विशेष—इसमें डेढ़ डेढ़ बालिश्त की पाँच तीलियाँ होती हैं और नीचे तिरछे बल में इतनी ही बड़ी एक और तीली होती है । यह ठाठ सवा गज लबी एक लकड़ी पर चढ़ा हुआ होता है जो करघे के लग्ये पर रखी जाती है ।
३. पतवार के ऊपरी सिर पर लगी हुई और दोनों और निकली हुई वह लकड़ी जिसके दोनों सिरों पर वे रस्सियो बँधी होती हैं, जिनकी सहायता से पतवार घुमाते हैं । (लश॰) ।
४. जहाज में रस्से बाँधने के खूँटे आदि का वह बनाया हुआ ऊपरी भाग जिसमें लकड़ी या लोहा दोनों या चारा और इस अभिप्राय से निकला हुआ रहता है कि जिसमें उस खूँटे में बाँधा हुआ रस्सा ऊपर न निकल आवे । (लश॰) ।