माँड़ा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]माँड़ा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ मण्ड] आँख का एक रोग जिसमें उसके ऊपरी पदें के अंदर महीन झिल्ली सी पड़ जाती है । विशेष— इस झिल्ली का रंग चावल के माँड़ के समान होता है । यह औषधोपचार या शास्त्रक्रिया से निकाला भी जाता है ।
माँड़ा ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ माँड़ना(=गूँधना)]
१. एक प्रकार की बहुत पतली रोटी जो मैदे की होती है और घी में पकती है । लुचई । उ॰— (क) मुर्दा दोजख में जाय या विहिश्त में, हमें तो अपने हलुवे माँड़े से काम है । (कहावत) । (ख) काकी भूख गई वयारि भख बिना दूध धृतं माँड़े ।—सूर (शब्द॰) ।
२. एक प्रकार की रोटी जो तवे पर थोड़ा घी लगाकर पकाई जाती है । पराँठा । उलटा ।