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मानों

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मानों अव्य [हि॰ मानना] जैसे । गोया । उ॰—(क) मयनमहन पुरदहन गहन जानि आनि कै सबै को सारु धनुष गढ़ायो है । जनक सदसि जहाँ भले भेले भूमिपाल कियो बलहीन बल आपनो बढ़ायो है । कुलिस कठोर कूर्म पीठ तें कठिन अति हठि न पिनाक काहू चपारि चढ़ायो है । चुलसी सो राम के सरोज पानि परसत टूट्यौ मानों वरि ते पुरारि ही पढ़ायो है ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) तिलक भाल पर परम मनोहर गोरोचन को दीन्हों । मानों तीन लोक की शोभा अधिक उदय सो कीन्हों ।— सूर (शब्द॰) । (ग) प्रिय पठयो मानों सखि सुजान । जगभूषण को भूषण निधान । निज आई हम को सीख देन । यह किधौँ हमारी भरम लेन ।— केशव (शब्द॰) ।