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मालवश्री

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मालवश्री संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] श्री राग की एक रागिनी का नाम । विशेष—यह संपुर्ण जाति की रागिनी है और इसके गाने का समय सायंकाल है । नारद इसे मालव की रागिनी मानते है और हनुमत् इसे हिंडोल राग की रागिनी लिखते हैं । हनुमत् इसे ओड़व जाति की मानते है और इसके गाने में धैवत और गांधार को वर्जित लिखते हैं । इसे मालश्री और मालसी भी कहते हैं ।