मिनकार
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मिनकार † संज्ञा पुं॰ [अनु॰?] जिससे मिन् मिन् किया जाय अर्थात् मुख या चोंच । उ॰—अधिक तेज काँटे ते वी सख्त बोल । लग्या बोलने तांई मिनकार खोल । †दक्खिनी॰, पृ॰ ९० ।
मिनकार † संज्ञा पुं॰ [अनु॰?] जिससे मिन् मिन् किया जाय अर्थात् मुख या चोंच । उ॰—अधिक तेज काँटे ते वी सख्त बोल । लग्या बोलने तांई मिनकार खोल । †दक्खिनी॰, पृ॰ ९० ।