मिसल
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मिसल संज्ञा स्त्री॰ [अ॰ मिसिल]
१. सिक्खों के वे अनेक समूह जो अलग अलग नायकों की अधीनता में स्वतंत्र हो गए थे । विशेष—गुरु नानक के बंदा नामक शिष्य की देखादेखी और भी अनेक सिख सरदारों ने अपने अपने समूह स्थापित कर लिए थे, जिन्हें वे मिसल कहते थे । जैसे, भंगियों की मिसल, रामगढ़िया मिसल, अहलूवालिया मिसल आदि ।
२. समूह । झुंड । पंक्ति । श्रेणी । दल । उ॰— देखि कुसंग पाँव नहिं दीजै जहाँ न हरि की गल रे । जो ना मोक्ष मुक्ति कूँ चाहै संता बैसि मिसल रे ।— राम॰ धर्म॰ पृ॰ १४५ । ज— गेर मिसल ठाढ़ों किया, अंतरजामी नाम ।— शिखर, पृ॰, ३१० । मुहा॰—मिसल बिगाड़ना=मुकदमे के सिलसिलेवार कागजात इधर उधर कर देना । उ॰— क्रोध कोतवाल लोभ नाजर की मिसलत ज्ञान मुद्दई की जिन मिसल विगारी है ।— राम॰ धर्म॰, पृ॰ ५७ । मिसल बैठाना=सिलसिला या क्रम ठीक करना । उ॰— इस पेचदार बात की मिसल बैठाने के वास्ते मैं अपनी प्यारी मनमोहनी को बुलाता हूँ ।— श्रीनिवास ग्रं॰, पृ॰ ३४ ।