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मुखग्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मुखग्र संज्ञा पुं॰ [सं॰ मुखाग्र] दे॰ 'मुखाग्र' । उ॰—हजार कोटी जु होइ रसना एक एक मुखग्र । इडा अरब्बिन जो बसै रसनानि मंडि समग्र ।—भिखारी॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ २० ।