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मुखव्यङ्ग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मुखव्यंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ मुखव्यंग्य] मुँह पर पड़नेवाले छोटे छोटे दाग । विशेष— वैद्यक के अनुसार अधिक क्रोध या परिश्रम करने के कारण वायु और पित्त के मिल जाने से ये दाग होते हैं । इनसे कोई कष्ट तो नहीं होता, पर मुख की शोभा बिगड़ जाती है ।