मुरवा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मुरवा ^१ संज्ञा पुं॰ [देश॰]
१. एड़ी के ऊपर की हड्डी के चारों ओर का घेरा । पैर का गिट्टा । उ॰—(क) एड़िन चढ़ि गुलुफन चढ़ी मुरवन बची दवाइ । सो चित चिकने जधन चढ़ि तितहिं परो बिछिलाई ।—रामसहाय (शब्द॰) । (ख) लखि प्रभु पाछे पाउँ पसारा । परसि बही मुरवन तक धारा ।—विश्राम (शब्द॰) । (ग) रह्यो ढीठ ढारस गहै ससहर गयौ न सूर । मुरयो न मन मुरवान चुभि भौ चूरन चपि चूर ।—बिहारी (शब्द॰) ।
२. एक प्रकार की कपास जो ३४ वर्ष तक फलती है ।
मुरवा † ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ मयूर] दे॰ 'मोर' ।