मुश्क
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मुश्क ^१ संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰]
१. कस्तूरी । मृगमद । मृगनाभि । †
२. गंध । बू ।
मुश्क ^२ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] कवि और कोहनी के बीच का भाग । भुजा । बाँह । मुहा॰—मुश्कें कसना या बाँधना = (अपराधी आदि की) दोनों भुजाओं को पीठ की ओर करके बाँध देना । (इससे आदमी बेबस हो जाता है ।)
मुश्क बिलाई संज्ञा स्त्री॰ [फ़ा॰ मुश्क + हिं॰ बिलाई (= बिल्ली)] एक प्रकार का जंगली बिलाव जिसके अंडकोशों का पसीना बहुत सुगंधित होता है । गंध बिलाव । विशेष—अरबी में इसे जुबाद और संस्कृत में गंधमार्जार कहते है । इसके कान गोल और छोटे होते हैं और रंग भूरा होता है । दूम काली होती है, पर उसपर सफेद छल्ले पड़े रहते हैं । लंबाई प्रायः ४० इंच होती है । यह जंतु राजपूताने और पंजाब के सिवा बाकी सारे हिंदुस्तान में पाया जाता है । यह बिलों में रहता है, शिकारी होता है और पाला भी जा सकता है । यह चूहे, गिलहरी आदि खाकर रहता है । इसकी कई जातियाँ होती हैं । जैसे, भोंडर, लकाटी इत्यादि ।