मूसना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मूसना क्रि॰ स॰ [सं॰ मूषण] चुराकर उठा ले जाना । उ॰— (क) मूसत पाँच चोर करि दंगा । रहत हितू ह्वै निसि दिन सैंगा ।—रघुनाथदास (शब्द॰) । (ख) भीतर भीतर सब रस चूसै, हाँसि हाँसि कै तन धन मूसै ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ८११ । (ग) सुनितय बिरद रूप रस नागरि लीन्ही पलटि कछू सी । तेरे हेत प्रेम संपति सखि सो संपति केहि मूसी ।—सूर (शब्द॰) । (घ) दिया मँदिर निसि कलै उजेरा । दिया नाहिं घर मूसहिं चोरा ।—जायसी (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—ले जाना ।—लेना ।