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मृगया

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मृगया

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मृगया संज्ञा पुं॰ [सं॰] शिकार । अहेर । आखेट । उ॰—(क) हम छत्री मृगया बन करहीं । तुमसे खल मृग खोजत फिरहीं ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख)एक दिवस मृगया को निकस्यो कंठ महामणि लाइ ।—सुर (शब्द॰) । (ग) भुलि परी मृग को मृग चाहि भई मृगया की मृगी मृगनैनी ।—देव (शब्द॰) । यौ॰—मृगयाक्ररीड़न =शिकार खेलने की प्रसन्नता । मृगयाधर्म = शीकार खेलने का नियम । मृगयायान =मित्रों के साथ सदलवल शिकार खेलने जाना । मृगयारस =शिकार खेलने का आनंद । मृगयावन =शिकारगाह । मृगयाव्यसन =आखेट का व्यसन या आदत ।