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मेदपाट

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मेदपाट संज्ञा पुं॰ [सं॰] मेवाड़ । उ॰—शत्रुराजाओं के आयुष्यरूपी पवन का पान करने के लिये चलती हुई कृष्णसर्प जैसी तलवार के अभियान के कारण मेदपाट (मेवाड़) के राजा जयतल (जैत्रसिंह) ने हमारे साथ मेल न किया ।—राज॰ इति॰, पृ॰ ४६० ।