मेरुशिखर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मेरुशिखर संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. मेरु की चोटी ।
२. हठयोग में माने हुए मस्तक के छह चक्रों मे से सबसे ऊपर का चक्र । विशेष—इसका स्थान ब्रह्मरंघ्र, रंग अवर्णनीय और देवता चिन्मय शाकत है । इसके दलों की संख्या १०० और दलों का अक्षर ओंकार है । इसे सहस्रार भी कहते हैं ।