मेल्हना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मेल्हना † ^१ क्रि॰ स॰ [प्रा॰ मेल्ल, गुज॰ मेलबुं = (छोड़ना, रखना)]
१. छोड़ना । रखना । डालना । उ॰—पग पलका की सुधि नहीं सार सबद क्या होइ । कर मुख माहैं मेल्हताँ, दादू लखै न कोइ ।—दादू॰, बानी, पृ॰ ३९० ।
२. गड़ा रहना । पड़ा रहना । उ॰—मेल्ही रही सूम की थाती । सुंदर दी आगै कौं थाती ।—सुंदर ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ३५८ ।
मेल्हना ^२ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] एक प्रकार की नाव जिसका सिक्का खड़ा रहता है ।
मेल्हना † ^३ क्रि॰ अ॰
१. क्लेश या पीड़ा से बार बार इस करवट से उस करवट होना । छटपटाना । बेचैन होना ।
२. कोई काम करने में आनाकानी करके समय बिताना ।