सामग्री पर जाएँ

मोँ

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

मोँ ^१ अव्य॰ [सं॰ स्मिनू] दे॰ 'में' । उ॰—तनपोपक नारि नरा सिगरे । परनिंदक ते जग मों बगरे ।—तुलसी (शब्द॰) ।

मोँ ^२ सर्व॰ [सं॰ मह्मम्] खड़ी बोली के 'मुझ' के समान ब्रज और अवधी में 'मैं' का वह रूप जो असे कर्ताकारक के अतिरिक्त और किसी कारक का चिह्न लगने के पहले प्राप्त होता है । जैसे, मयु मोंको, मोंपै, इत्यादि । उ॰—(क) साहिव की आग्या है मोंऊँ ।—रामानंद॰, पृ॰ २९ । (ख) काँपी भौंह पुहुप पर देखे । जनु ससि गहन तैस मोंहि लेखे ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ १४३ ।