मोटा

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हिन्दी[सम्पादन]

विशेषण[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मोटा ^१ वि॰ [सं॰ मुष्ट ( = मोटा ताजा आदमी) या हिं॰ मोट] [वि॰ स्त्री॰ मोटी]

१. जिसके शरीर में आवश्यकता से आधिक मांस हो । जिसका शरीर चरबी आदि के कारण बहुत फूल गया हो । जिसका शरीर चरबी आदि के कारण बहुत फूल गया हो । दुबला का उलटा । स्थूल शरीरवाला । जेसे, मोटा आदमी, मोटा बंदर । पु †

२. श्रेष्ठ । वरिष्ठ । उ॰— अग्रज अनुज सहोदर जोरी, गौर श्याम गूंथै सिर चोटा । नंददास बलि बलि इहि सूरति लीला ललित सबहि बिधि मोटा ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ ३४१ । यो॰—मोटा ताजा या मोटा झोटा = (१) स्थूल शरीरवाला । (२) जिसकी एक ओर की सतह दूसरी ओर की सतह से आधिक दूरी पर हो । पतला का उलटा । दबीज । दलदार । गाढा । जैसे, मोटा कागज, मोटा कपड़ा, मोटा तख्ता ।

३. जिसका घेरा या मान आदि साधारण से आधिक हो । जैसे, मोटा डंड़ा, मोटा छड़, मोटी कलम । मुहा॰—मोटा असामी = जिसके पास अधिक धन हो । अमीर । मोटा भाग = सौभाग्य । खुशकिस्मती । उ॰—सहज सँतोषहि पाइए दादू मोटे भाग ।—दादू (शब्द॰) । (ख) सूरदास प्रभु मुदित जसोदा भाग बड़े करमन की मोटी ।—सूर (शब्द॰) ।

४. जो खूब चूर्ण न हुआ हो । जिसके कण खूब महीन न हो गए हों । दरदरा । जैसे,—यह आटा मोटा है ।

५. बढ़िया या सूक्ष्म का उलटा । निम्न कोटि का । घटिया । खराब । जैसे, मोटा आनाज, मोटा कपड़ा, मोटी अकल । उ॰—भूमि सयन पट मोट पुराना ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) तुम जानति राधा है छोटी । चतुराई अँग अंग भरी है, पूरण ज्ञान न बुद्धि की मोटी ।—सूर (शब्द॰) । मुहा॰—मोटा झोटा = धटिया । खराब । मोटी बात = साधारण बात । मामूली बात । मोटे हिसाब से = अंदाज से । अटकल से । बिल्कुल ठीक ठीक नहीं । मोटे तौर पर = बहुत सूक्ष्म विचार के अनुसार नहीं । स्थूल रूप से ।

६. जो देखने में भला न जान पड़े । भद्दा । बैडौल । उ॰—हरि कर राजत माखन रोटी । मनु बारिज ससि बैर जानि कै गह्यौ सुधा ससुधौटी । मेली सजि मुख अंबुज भीतर उपजी उपमा मोटी । मनु बराह भूधर सह पुहुमी धरी दसन की कोटी ।—सूर॰, १० ।१६४ । मुहा॰—मोटी चुनाई = बिना गढे़ हुए बेडौल पत्थरों की जोड़ाई । मोटी भूल = भद्दी या भारी भूल ।

७. साधारण से अधिक । भारी या कठिन । जैसे, मोटी मार, मोटी हानि, मोटा खर्च । उ॰—(क) बंदौ खल मल रूप जे काम भक्त अघ खानि । पर दुख सोइ सुख जिन्हें पर सुख मोटी हानि ।—विश्राम (शब्द॰) । (ख) दुर्बल को न सताइए जाकी मोटी हाय । बिना जीव की स्वाँस से लोह भसम ह्वै जाय ।—कबीर (शब्द॰) । (ग) नारि नर आरत पुकारत सुनै न कोऊ, काहू देवननि मिलि मोटी मूठ मार दो ।—तुलसी (शब्द॰) । मुहा॰—मोटा दिखाई देना = आँख की ज्योति में कमी होना । कम दिखाई देना । केवल मोटी चीर्जे दिखाई देना ।

८. घमंडी । अहंकारी । अभिमानी । उ॰—मोटी दसकंध सो न दूवरो विभीपण सो बूझि परी रावरे की प्रेम पराधीनता ।—तुलसी (शब्द॰) ।

मोटा ^२ संज्ञा पुं॰ मरवाँ जमीन । मार ।

मोटा † ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ मोट] बोझ गट्ठड़ ।

मोटा ^४ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] बला । वरियारा नाम का क्षुप । विशेष दे॰ 'बरियारा' [को॰] ।