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मोरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मोरना पु ^१ क्रि॰ स॰ [हिं॰ मोड़ना] दे॰ 'मोड़ना' । उ॰—(क) फिर फिर सुंदर ग्रीवा मारत । देखत रथ पाछे जो घोरत । लक्ष्मणसिंह (शब्द॰) । (ख) चोरि चोरि चित चितवति मुँह मोरि मोरि काहे तें हँसति हिय हरष बढ़ायो है ।—केशव (शब्द॰) । (ग) कर आँचार को ओट करि जमुहानी मुख मोरि ।—बिहारी । (शब्द॰) । (घ) नासा मोरि नचाय दृग करी कका की सौंहँ ।—बिहारी (शब्द॰) ।

मोरना ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰ मोरन] दही को मथकर मक्खन निका- लना । (वुंदेलखंड) । उ॰—डीठडोर नै मोर दिय छिरक रुपरस तोय । मथि मा घट प्रतीम लियो मन नवनीत बिलोय ।—रसनिधि (शब्द॰) ।