मोरपखा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]मोरपखा पु † संज्ञा पुं॰ [हिं॰ मोरपंख]
१. मोर का पर । मोरपंख ।
२. मोरपंख की कलगी जो प्रायः श्रीकृष्ण जी मुकुट या चीर में खोंसा करते थे । उ॰—(क) बाँसुरि कुंडल मोरपखा मघुरी मुसकानि भरी मुख है ये ।—बेनी (शब्द॰) ।(ख) पीत पटी लकुटी पदमाकर मोरपखा लै कहुँ गति नाखा । पद्माकर (शब्द॰) । (ग) क्यों करि धौं मुरली मनि कुंडल मोरपखा बनमाल बिसारै । ते धनि जे ब्रजराज लके गृहकाज करैं अरु लाज सँभारैं ।—मतिराम (शब्द॰) ।