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मोहिनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मोहिनी ^१ वि॰ स्त्री॰ [सं॰] मोहनेवाली ।

मोहिनी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. त्रिपुरमाली नामक फुल । वटपत्रा । बेला ।

२. बिष्णु के एक अवतार का नाम । विशेष—भागवत के अनुसार विष्णु ने यह अवतार उस समय लिया था, जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर रत्नों को निका- लने के लिये समुद्र मथा था और अमृतके निकलने पर दोनों उसके लिये परस्पर झगड़ रहे थे । उस समय भगवान् ने मोहिनी अवतार धारण किया था और उन्हें देखते ही असुर मोहित होकर बोले थे कि अच्छा आओ, हम दोनों दलों के लोग बैठ जाँय और मोहिनी अपने हाथ से हम लोगों को अमृत बाँट दे । दोनों दलों के लोग पंक्ति बाँधकर बैठ गए और मोहिनी रुप विष्णु ने अमृत बाँटने के बहाने से देवताओं को अमृत और असुरों को सुरा पिला दी ।

३. माया । जादु । टोना । उ॰—देवी ने ऐसी मोहिनी डाली थी कि यशोदा को लड़की के होने की भी सुध नहीं थी ।—लल्लु (शब्द॰) ।

४. वैशाख शुक्ल एकादशी का नाम ।

५. एक अप्सरा का नाम (को॰) ।

६. एक अर्धम वृत्त का नाम जिसके पहले और तीसरे चरणों में बारह और दुसरे तथा चौथे चरणों में सात मात्राएँ होती है; और प्रत्येक चरण के अंत में एक सगण अवश्य होता है । उ॰—शंभु भक्तजनत्राता भवदुख हरैं । मनवांछित फलदाता मुनि हिय वरैं ।—छंद॰, पृ॰ ७३ ।

७. पंद्रह अक्षरों के वर्णिक छंद का नाम जिसके प्रत्येक चरण में सगण, भगण, तगण, यगण, और सगण होते हैं । उ॰— शुभ तो ये सखि री आदिहुँ जो चित्त धरी । नर औ नारि पढ़ैं भारत के एक घरी ।—छद॰, पृ॰ २०८ ।