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मौक्तिकदाम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मौक्तिकदाम संज्ञा पुं॰ [सं॰] बारह अक्षरों का एक वर्णिक छंद जिसके प्रत्येक चरण में दूसरा, पाँचवाँ, आठवाँ, और ग्यारहवाँ वर्ण गुरु और शेष लघु होते है; अर्थात् जिसके प्रत्येक चरण में चार जगण होते हैं । उ॰—दुख्यो हियं केतिक देखत भूप । करयो तब तापर रोष अनुप । वियोगिनि के उर भेदत रोजु । करै तुमको निज बाण मनोजु ।—गुमान (शब्द॰) ।

२. मोतियों की लड़ी ।